भारतीय रेलवे की आरओ-आरओ (RO-RO) सर्विस

लोडेड ट्रकों की तेज़ आवाजाही के लिए, मध्य और दक्षिण पश्चिम रेलवे अगले कुछ दिनों में रोल-ऑफ (रोलो) सेवाएं शुरू करेंगे।

भारतीय रेलवे की आरओ-आरओ (RO-RO) सर्विस

RORO का मतलब है रोल-ऑन / रोल-ऑफ, जहां लोडेड ट्रकों को सीधे रेलवे वैगनों द्वारा उनके गंतव्य तक ले जाया जाता है।  भारत में पहली बार RO-RO सेवा कोंकण रेलवे द्वारा चलाई गई थी।  कोंकण रेलवे भारत के कठिन इलाकों से होकर गुजरती है।  उसी रास्ते से होकर गुजरने वाला NH-66 है।  ट्रक ड्राइवरों को उबड़ खाबड़ सतहों, संकीर्ण और खराब सड़क और मौसम की स्थिति में ट्रक ड्राइव करना बेहद मुश्किल लगता है।

भारतीय रेलवे की आरओ-आरओ (RO-RO) सर्विस
Image source : google (भारतीय रेलवे की आरओ-आरओ (RO-RO) सर्विस)

केआरसीएल RORO की अवधारणा के साथ आया, जहां RORO में लोड किए गए ट्रकों को वैगनों पर ले जाया जाता है और ट्रेन से यात्रा की जाती है। इससे ईंधन की बचत, टूट-फूट में कमी और लॉरियों (ट्रकों) के दोहन में मदद मिली है । साथ ही चरम स्थितियों में ड्राइवरों को ड्राइविंग से राहत, तेजी से गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलती है। इससे सड़कों के अपक्षरण और प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलती है। यह अवधारणा ट्रक ऑपरेटरों और केआरसी दोनों के लिए फायदेमंद रही है ।

एक पूरी तरह से भरा हुआ ट्रक जम्मू से कन्याकुमारी पहुँचने के लिए सड़क मार्ग से लगभग 14-15 दिन लेता है, जबकि RO-RO सेवा का उपयोग करके इस दूरी को 5-6 दिनों में कवर किया जा सकता है। यह आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए माल से भरे वाहनों का परिवहन करेगा ।
भारतीय रेलवे ने वर्ष 1999 के दौरान कोंकण रेलवे पर रोल-ऑन-रोल-ऑफ (RO-RO) सेवा की शुरुआत की थी। तब से, यह सेवा डीजल मार्ग पर कोंकण रेलवे में चल रही है।

एक पूरी तरह से भरा हुआ ट्रक जम्मू से कन्याकुमारी पहुँचने के लिए सड़क मार्ग से लगभग 14-15 दिन लेता है, जबकि RO-RO सेवा का उपयोग करके इस दूरी को 5-6 दिनों में कवर किया जा सकता है। यह आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए माल से भरे वाहनों का परिवहन करेगा ।

भारतीय रेलवे ने वर्ष 1999 के दौरान कोंकण रेलवे पर रोल-ऑन-रोल-ऑफ (RO-RO) सेवा की शुरुआत की थी। तब से, यह सेवा डीजल मार्ग पर कोंकण रेलवे में चल रही है।

आरओ-आरओ वर्तमान में गोवा और कोलाड-सुरथकल (721 किमी) में कोलाड (मुंबई) और वर्ना (417 किमी) के बीच दो सेवाएं संचालित करता है।  हुबली क्षेत्र से ट्रकों के लिए अंकोला और सुरथकल के बीच आरओ-आरओ सेवा भी उपलब्ध है।

रोल-ऑन-रोल-ऑफ 'एक ऐसा वितरण मॉडल है जो मल्टीमॉडल परिवहन मिश्रण प्रदान कर सकता है।  योजना के तहत, सड़कों पर लोड ट्रकों को सड़कों पर भीड़ से बचने के लिए ले जाया जाएगा।  एक रैक में, लगभग 44 लोड / खाली ट्रकों को स्थानांतरित किया जाएगा। सड़कों पर आजकल ट्रैफिक की समस्या आम बात है । ऐसे में बड़ी औद्योगिक इकाइयों को सड़क परिवहन से माल ढुलाई बिल्कुल भी किफायती विकल्प नही लगता ।
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एक किफायती कदम

आरओ-आरओ मॉडल रेलवे की एक उपयोगी योजना है और चूंकि यह ईंधन की बचत करने में मदद करता है और इसमें सड़क परिवहन से समय भी कम लगता  है इसलिए यह सड़क परिवहन में लगने वाली लागत से अधिक किफायती है।

 पूरे देश में 25 मार्च से जब तालाबंदी शुरू हो गई थी और देश में कोविड़ -19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए 3 मई तक इसे बढ़ा दिया गया, तब आरओ-आरओ मॉडल ने ही कोंकण क्षेत्र में कई ट्रांसपोर्टरों के लिए बचाव का अभियान छेड़ा।

यह सेवा विभिन्न राज्यों के बीच वस्तुओं के परिवहन में मौजूदा अड़चनों को दूर करेगी और सुरक्षित, त्वरित और अधिक विश्वसनीय परिवहन की सुविधा प्रदान करेगी।

परिवहन में वृद्धि 

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो का अप्रैल माह में क्लिप साझा किया जिसमें एक RO-RO रेक को गुजरते हुए देखा जा सकता है।


 उन्होंने लिखा, "आवश्यक वस्तुओं की शीघ्र और कुशल आपूर्ति सुनिश्चित करते हुये, रेलवे ने लोडेड ट्रकों को ले जाने के लिए रोल-ऑन रोल-ऑफ (रो-रो) सुविधाओं का उपयोग करके परिवहन में वृद्धि की है।
RO-RO सेवा सड़क पर दुर्घटनाओं को कम करती है, जिससे सुरक्षा में सुधार होता है, ईंधन और विदेशी मुद्रा की बचत होती है।  यह आवश्यक वस्तुओं, पेरीशबल्स, खाद्य पदार्थों और छोटे कार्गो के तेजी से परिवहन को सुनिश्चित करता है। इसमें परिवहन की लागत सड़क से परिवहन की तुलना में कम है ।

आरटीआई के तहत जानकारी से पता चला है कि कोलाड और सूरतकल के बीच 4,50,467 ट्रकों को ले जाया गया ।  औसतन प्रति दिन 93 ट्रक लोड किए गए और औसत 2.1 यात्राएं प्रति दिन आयोजित की गईं।
(2018-19 यातायात के आधार पर)

प्रदूषण के स्तर में कमी 

आरओ-आरओ ट्रेन में बोगियां या वैगन नहीं होते हैं।  यह एक लंबे धातु मंच के साथ खींचती है जिस पर माल के साथ ट्रक/लॉरी भरी रहती हैं।  लॉरी के चालक और क्लीनर अपने वाहनों में बैठे रहते हैं।  उन्हें उनके गंतव्य पर उतार दिया जाता है जहां से वे ड्राइव कर के अपने वाहनों को ले जाते हैं। इस प्रकार के परिवहन में जहां डीजल की बचत होती है वहीं ट्रांसपोर्टर्स का खर्च काफी कम हो जाता है । इस सेवा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस सेवा के चलते ट्रकों को शहरों में दाखिल नहीं होना होता जिससे सड़क पर जाम की समस्या से मुक्ति मिलती है. वहीं डीजल की बचत के चलते प्रदूषण के स्तर में भी कमी आती है.

माजुली द्वीप के लिये नई रो-रो सुविधा

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (Inland Waterways Authority of India- IWAI) असम सरकार के सहयोग से माजुली द्वीप के लिये रोल ऑन – रोल ऑफ (Roll on- Roll off, Ro-Ro) सुविधा शुरू करेगी।

इस रो-रो सुविधा वाले नदी मार्ग के इस्‍तेमाल से 423 किलोमीटर लंबे घुमावदार सड़क मार्ग की दूरी, घटकर केवल 12.7 किलोमीटर रह जाएगी।.

IWAI ने नई सेवा के लिये 9.46 करोड़ रुपए की लागत से एक नया जहाज़ एमवी भूपेन हजारिका खरीदा है और इसके लिये आवश्‍यक टर्मिनल कि सुविधा प्रदान की गई है।
यह 46.5 मीटर लंबा और 13.3 मीटर चौड़ा जहाज़ 8 ट्रक और 100 यात्रियों को ले जा सकता है।

 IWAI ब्रह्मपुत्र नदी में इस्‍तेमाल के लिये कुछ और ऐसे रो-रो जहाज़ खरीदने की योजना बना रहा है। इससे पहले IWAI इसी तरह की रो-रो सेवा धुबरी और हतसिंगीमारी के बीच शुरू कर चुका है जिससे यात्रा की दूरी 190 किलोमीटर कम हो गई है।

इसके लिये धुबरी में एक स्‍थायी रो-रो टर्मिनल का निर्माण किया गया है।  ब्रह्मपुत्र नदी के 11 स्‍थानों पर तैरते हुए टर्मिनल बनाए गए हैं।

 ये टर्मिनल हैं- हतसिंगीमारी, धुबरी, जोगीघोपा, तेजपुर, सिलघाट, विश्‍वनाथ घाट, नीमाती, सेंगाजन, बोगीबील, डिब्रूगढ़/ओकलैंड और ओरिमघाट।                       

ब्रह्मपुत्र नदी स्थित माजुली द्वीप दुनिया के सबसे बड़े द्वीपों में से एक है और इसे संपर्क व्यवस्था के मामले में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें 144 गाँव हैं जिनकी आबादी 1,50,000 से अधिक है।

नदी के किसी भी तरफ रहने वाले लोगों को अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों के लिये विभिन्‍न स्‍थानों पर परंपरागत नौकाओं का इस्‍तेमाल करना पड़ता है। पर्याप्‍त संख्‍या में पुल, कार्गों और यात्रियों की आवाज़ाही के अभाव में लंबा रास्‍ता तय करना पड़ता है जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
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