करेंट अफेयर्स - COVID-19, Corona virus

   31 दिसंबर, 2019 को चीन ने हुबेई प्रांत के वुहान शहर में अज्ञात कारण से निमोनिया (Pneumonia) के कुछ मामलों की सूचना विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी । 9 जनवरी, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने एक आधिकारिक बयान में यह कहा कि चीन के वुहान शहर में जिन अज्ञात कारणों से निमोनिया के कुछ मामलों की पुष्टि हुई थी, उसकी चीन के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस नामक एक नए प्रकार के वायरस के रूप में पहचान की है।


    नामकरण 

    जब इस वायरस की पहचान की गई थी, तब विश्व स्नवास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने इसे 'नोवेल कोरोना वायरस-2019' (2019-nCov) नाम दिया था, परंतु बाद में 11 फरवरी, 2020 को इस वायरस का नाम 'सार्स-कोव -2' (Severe Acute Respiratory Syndrome Corona Virus-2 : SARS-CoV-2) रखा तथा इस वायरस से जनित बीमारी का नाम 'कोविड-19' (COVID-19, Coronavirus Disease) रखा। वायरस का यह नाम विश्व स्वारस्थ्य संगठन द्वारा इसलिए दिया गया, क्योंकि यह वायरस अतीत में वर्ष 2003 के सार्स महामारी के लिए जिम्मेदार कोरानावायरस आनुवांशिक रूप से संबंधित है।

        प्रारंभ मे इस वायरस का मुख्य केंद्र चीन, विशेष रूप से उसका वुहान शहर था। धीरे-धीरे यह वायरस द. कोरिया, ईरान और आस-पास के अन्य देशों को अपनी जद में लेने लगा। तब भी दुनिया के अधिकांश देश इसे एक क्षेत्रीय और विशेष रूप से चीन की समस्या मानते थे। इस वायरस से दुनिया के विभिन्न देश तब स्तबध रह गए, जब इसने मार्च के दूसरे सप्ताह में 114 देशों के 1,18,000 लोगों को अपनी जद में ले लिया तथा इसके संक्रमण से होने वाली मौत का आंकड़ा 4291 तक पहुंच गया। इस स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस को 11 मार्च, 2020 को कोविड-19 (Covid-19) को बैश्चिक महामारी (Pandemic) घोषित करना पड़ा

        30 जनवरी, 2020 को पहली बार भारत के केरल राज्य में 'कोविडङ-19' के संक्रमण की पुष्टि की गई थी। संक्रमित व्यक्ति चीन के वुहान विश्वविद्यालय केंद्र का भारतीय छात्र था

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    एनडेमिक (Ende mic), एपिडेमिक (Epide mic) और  पैनडेमिक (Pandemic) में अंतर 

    (i) एनडेमिक (Ende mic)-जब कोई रोग किसी विशेष क्षेत्र या जनसंख्या में स्थायी रूप से विद्यमान रहता है, तो ऐसी रि्थिति एनडेमिक कहलाती है।

    (ii) एपिडेमिक (Epide mic)-जब कोई संक्रामक रोग किसी निश्चित जनसंख्या में बड़ी संख्या में लोगों में कम समय में तेजी से फैलता है, तो ऐसी स्थिति एपिडेमिक कहलाती है।

    (iii) पैनडेमिक (Pandemic)- एपिडेमिक स्थिति का ही विश्व के वृहत क्षेत्र में विस्तार पैनडेमिक कहलाता है।

         

    कोरोना वायरस का वर्गीकरण 

    कोरोना वायरस के चार उप-समूह है, जिन्हे अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा के रूप में जाना जाता है। अभी तक 7 कोरोना वायरस की पहचान की जा चुकी है। बीमारी की गंभीरता के आधार पर इन सभी को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है : 

    सामान्य मानव कोरानावायरस

    इस समूह के अंतर्गत 4 प्रकार के कोरोना वायरस शामिल किए जाते हैं-
    ⇒ 229 E (अल्फा कोरोना वायरस)
    ⇒ NL63 (अल्फा कोरोना वायरस)
    ⇒ OC43 (बीटा कोरोना वायरस)
    ⇒ HKUI (बीटा कोरोना वायरस)

    अन्य मानव कोरोनायायरस

    इस समूह के अंतर्गत 3 प्रकार के कोरोना वायरस शामिल किए जाते हैं :
    MERS-Cov (बीटा कोरोना वायरस, जो मध्य-पूर्व श्वसन सिंड्रोम के लिए उत्तरदायी है)।
    SARS-Cov (बीटा कोरोना वायरस, जो गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम के लिए उत्तरदायी है)।
    SARS-CoV-2 (वर्तमान वैश्विक महामारी के लिए जिम्मेदार नोवेल (Novel) कोरोना वायरस)

    दुनियाभर मे मनुष्य आमतौर पर 229E, NL63, OC43 और HKUI मानव कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं।  


        सार्स-कोव (SARS-Cov) कोरोना वायरस का एक प्रकार है, जिसकी पहली बार पहचान नवंबर, 2002 में चीन में गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम कोरोना वायरस (Severe Acute Respiratory Syndrome Corona Virus) के रूप में की गई थी। यह कोरोना वायरस वर्ष 2002-03 में 8,098 संक्रमित मामलों, जिसमें 774 मृत्यु के मामले भी शामिल हैं, के साथ विश्वव्यापी प्रकोप के लिए उत्तरदायी था। 

        वर्ष 2004 के बाद इस वायरस से संक्रमण के मामले विश्वभर में कहीं भी प्रकाश में नहीं आए हैं। 
    वर्तमान वैश्विक महामारी के लिए उत्तरदायी SARS-CoV-2 कोरोना वायरस 31 दिसंबर, 2019 को चीन के वुहान शहर में पहली बार प्रकाश में आया। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस वायरस का स्रोत चीन के हुनान प्रांत स्थिति सी-फूड होलसेल मार्केट (Sea Food Market) है ।


    वायरस के संक्रमण के सामान्य लक्षण

        (SARS-CoV-2) वायरस के संक्रमण के सामान्य लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, बुखार, खांसी, कफ इत्यादि शामिल हैं । अधिक गंभीर मामलों में निमोनिया, गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, गुर्दे की विफलता और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है। इस वायरस के संक्रमण से मनुष्य का फेफड़ा प्रभावित होता है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह अबरुद्ध होने लगता है, जिससे इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। 

     बचने का तरीका 

        गौरतलब है कि 'सार्स-कोव-2' वायरस से संक्रमित व्यक्ति के इलाज के लिए वर्तमान में कोई भी टीका उपलब्ध नहीं है। अतः इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा तरीका 'सतर्कता ही बचाव है' के मूलमंत्र को अपने दैनिक जीवन में अपनाना है। इसके तहत अपने चेहरे को मास्क या अन्य किसी भी तरह से ढंककर रखना, अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से धोते रहना, सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेसिंग) बनाए रखना तथा जब तक ज्यादा जरूरी न हो तब तक घर की लक्ष्मण रेखा को न लांघना अर्थात घर पर ही रहना आदि शामिल हैं।

    कोविड-19 : जांच की तकनीक

    भारत में कोविड-19 की जांच के लिए निम्नलिखित 3 परीक्षण तकनीक को प्रयोग में लाया गया है : 

    ⇒ आर.टी.-पी.सी.आर. (RT-PCR:Reverse Tianscription Polymerase Chain Reaction)

    आर.टी.-पी.सी.आर. परीक्षण वायरस सहित किसी भी रोगजनक (Pathogen) में विद्यमान विशिष्ट आनुवांशिक सामग्री का पता लगाने की एक विधि है। इस विधि के तहत परीक्षण करने के लिए विशिष्ट जैव सुरक्षा सावधानियों के साथ विशेषीकृत प्रयोगशाला की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए इस विधि के तहत परीक्षण उन जगहों पर किया जाना संभव नहीं है, जहां आणविक विषाणु विज्ञान की बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस विधि के तहत परीक्षण करने के लिए नाक या गले से बलगम या लार का नमूना लिया जाता है।

    ⇒ टूनैट (IruNat)

    टूनैट एक चिप-आधारित एवं पोर्टेबल RT-PCR मशीन होती है। नवीनतम टरनैट मशीनें कोरोना वायरस के RNA में विद्यमान एक एंजाइम (RdRp) का पता लगा सकती है। मानक RT-PCR परीक्षण की तुलना में टूनैट परीक्षण से कम समय में जांच परिणाम प्राप्त हो जाते हैं।

    ⇒ CBNAAT (Cartridge Based Nucleic Acid Amplification Test)

    यह मुख्यतः तपेदिक (TB) की जांच में प्रयुक्त होता है, जिसका कोविड-19 की जांच में भी प्रयोग किया जा रहा है।
    रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट (Rapid Antibody Test) रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किसी व्यक्ति के खून के नमूनों पर आधारित
    परीक्षण की एक ऐसी विधि है, जिसमें व्यक्ति में कोविड-19 बीमारी के प्रति विकसित एंटीबॉडी के आधार पर इस बात का पता लगाया जाता है कि वह व्यक्ति इस बीमारी से संक्रमित है या नहीं। परीक्षण की इस विधि को सीरोलॉजिकल टेस्ट, सीरोलॉजिकल ब्लड टेस्ट या सीरोलॉजी टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है। परीक्षण की इस विधि के तहत परिणाम 30मिनट से कम समय में प्राप्त हो जाता है। परीक्षण की इस विधि से यह ज्ञात होता है कि कोई व्यक्ति अतीत में कोविङ-19 से संक्रमित था या नहीं। चूंकि कोविङ-19 से संक्रमित किसी व्यक्ति में इस बीमारी के विरुद्ध एंटीबॉडी विकसित होने में अमूमन दो हफ्ते का समय लगता है। ऐसी स्थिति में किसी संक्रमित व्यक्ति का इस विधि के तहत बहुत जल्दी (दो हफ्ते से कम समय में) परीक्षण कर लिया गया है, तब परीक्षण के नतीजे गलत सिद्ध हो सकते हैं।

    कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय घटनाएं

    ⇒ कोविड-19 से संक्रमित होने वाले किसी देश के पहले प्रधानमंत्री ब्रिटेन के बोरिस जॉनसन हैं।

    ⇒ प्रिंस चार्ल्स कोविड-19 से संक्रमित ब्रिटिश राजपरिवार के पहले व्यक्ति हैं।

    ⇒ भारत में कोविड-19 से संक्रमित होने वाले प्रमुख व्यक्तियों में गृहमंत्री अमित शाह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा महानायक अभिताभ बच्चन शामिल हैं। 

    ⇒26 मार्च, 2020 को G-20 सम्मेलन का आयोजन सऊदी अरब में किया गया। कोविड-19 प्रकोप के दौरान इस सम्मेलन का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संपन्न हुआ। इसलिए इसे 'जी-20 वर्चुअल समिट' (Extaordinary G-20 Virtual Summit) नाम दिया गया। इस सम्मेलन में भारत का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र
    मोदी ने किया। 

    ⇒विश्व स्वास्थ्य संगठन, यू.एन. फाउंडेशन और अन्य सहयोगियों ने मिलकर अपनी तरह का पहला 'कोविड-19 सॉलिडैरिटी RTR फण्ड (COVID-19 Solidarity Response Fund) जारी किया। यह फण्ड विस्तृत क्षेत्र से दाताओं से अनुदान प्राप्त करके कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई जारी रखने में विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अन्य सहयोगियों की मदद करेगा। 

    ⇒ टोक्यो में प्रस्तावित ग्रीष्मकालीन ओलंपिक को कोविड-19 प्रकोप के मद्देनजर एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया। यह खेल इस वर्ष जुलाई-अगस्त में जापान के टोक्यो में आयोजित होने वाले थे।

    भारत द्वारा उठाये गये कदम 

        प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च को देश की जनता ने 'जनता कफ्फ्यू' को अपना भरपूर समर्थन दिया। इससे प्रेरित होकर प्रधानमंत्री ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में पूर्ण विजय प्राप्त करने के लिए 24 मार्च की रात को पूरे देश में 21 दिनों के लिए पूर्णबंदी (लॉकडाउन) की घोषणा की, जिसे 14 अप्रैल को 19 दिन के लिए और बढ़ाकर 3 मई, पुनः बढ़ाकर 17 मई तक और फिर 31 मई तक कर दिया गया। इस पूर्णबंदी की घोषणा के साथ रेलवे सहित अन्य सार्वजनिक वाहनों और निजी वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। रेलवे सेवा को इतिहास में पहली बार इतने दिनों के लिए स्थगित किया गया। पूर्णबंदी के दौरान केवल आवश्यक सेवाओं, जिसमें किराना दुकान, दुग्ध, सब्जी विक्रेता, मेडिकल सेवाएं इत्यादि शामिल हैं, को संचालित करने की अनुमति दी गई। 

        कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका सहित कई अन्य देशों को दवाओं की आपूर्ति की, जिसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) दवा प्रमुख है। भारत के इस मानवीय कदम की विश्व के सभी देशों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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