How to become a DRM in Indian Railway । भारतीय रेलवे में DRM कैसे बने ?

How to become a DRM in Indian Railway । भारतीय रेलवे में DRM कैसे बने ?


Indian Railways को 73 डिवीज़न में डिवाइड की गया है. प्रत्येक division के Head/ प्रमुख General Manager होते है. Indian Railways के इन सभी डिवीज़न को भी अलग अलग sections में divide किया गया है जैसे ये 8 तरह के अलग अलग विभाग है; 1. IRSSE (Indian Railway Service of Signal Engineers) इसके अंदर आते है Railway signalling and telecommunications departments) एक IRSSE अधिकारी सहायक सिग्नल एंड टेलीकॉम इंजीनियर (ASTE) के रूप में अपना करियर शुरू करता है। The career progression of Signal & Telcom engineer recruited through ESE is as follows: ASTE -> SSTE -> Dy. CSTE -> CPE (S&T) or CSE or CCE -> CSTE. 2. IRSE (Indian Railway Service of Engineers)
इनका काम है सभी fixed assets of Railways like track, buildings, bridges etc) आईआरएसई अधिकारी एईएन के रूप में शामिल होते हैं जो उनके अनुभाग का प्रभारी होता है, जिसमें लगभग 1700-1800 व्यक्ति काम करते हैं । और उनके बंगले में 8-10 व्यक्ति काम करते हैं। इन्हें मिलता है एक बड़ा बंगला और इसे well maintain बनाए रखने के लिए भरपूर मैन-पॉवर है । इनको अपेक्षाकृत तेजी से पदोन्नति भी मिलती है । 6 साल के भीतर, आप अधीक्षण अभियंता (Sr DEN) के समकक्ष सीनियर बन जाते हैं। 3. IRSME ( Indian Railway Service of Mechanical Engineers; जितने भीl movable assets है जैसे Locomotives coaches, wagons etc, Locomotive and wagon/coaches making units and their repairing workshops also come under this service) (except Electric locomotives) इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियरिंग (IRSME) भारतीय रेलवे के समूह 'ए' केंद्रीय सेवा में से एक है। इस सेवा के अधिकारी भारतीय रेलवे के मैकेनिकल इंजीनियरिंग संगठन के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं । IRSME अधिकारी इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा (ESE) परीक्षा से तैयार होते हैं। समूह 'ए' सेवाओं के लिए सभी नियुक्तियाँ भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती हैं। 4. IRPS (Indian Railway Personnel Service) इसका काम है employee recruitment and management) जैसे वेतन, पेंशन ट्रांसफर वगेरह वो सब इस विभाग के काम है दायित्व :- Manpower Planning Recruitment Training Promotions Seniority Reservation Transfer & Posting Payments, Salary & Wages Final Settlement Maintenance of cordial Industrial Relations Workers' participation in Management All Welfare Activities Grievance Redressal Legal & Court Cases Work Implementation of Labour Laws Hours of Employment Regulations (HOER) 5. IRTS (Indian Railway Traffic Service) इसका मुख्य कार्य है trains movement. कहा जा सकता है कि यह विभाग भारतीय रेलवे का सबसे दमदार विभाग है। भारतीय रेल यातायात सेवा (Indian Railway Traffic Service, IRTS) भारत सरकार का एक ग्रुप-ए स्तर का केंद्रीय नागरिक सेवा काडर (Central Civil Service Cader) है।

IRTS इसके वर्तमान रूप में 1967 में पुनर्निर्मित किया गया था। IRTS कैडर रेलवे मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत कार्य करता है। भारत सरकार के अधिकारियों के साथ-साथ इस सेवा के अधिकारी भारतीय रेलवे के विभिन्न तकनीकी विभागों के बीच समन्वय के लिए जिम्मेदार हैं। दूसरी तरफ, वे भारतीय रेलवे के सार्वजनिक इंटरफ़ेस तैयार करते हैं। बोलचाल की भाषा में ट्रैफ़िक अधिकारी, माल ढुलाई की योजना, यात्री परिवहन, यात्री सुविधाओं से लेकर स्टेशन प्रबंधन और बुनियादी ढाँचे की योजना बनाने तक रेलवे सेवाओं के प्राथमिक सूत्रधार हैं। 6. IRAS (Indian Railway Accounts Service) भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) भारत सरकार के प्रमुख समूह ए / क्लास - 1 में से एक है। इस सेवा के अधिकारी भारतीय रेलवे के लेखा और वित्त प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से हर साल लगभग 25-30 IRAS अधिकारियों की भर्ती की जाती है। वर्तमान में, IRAS कैडर में लगभग 650 अधिकारी कार्यरत हैं। 7. IRSEE (Indian Railway Service of Electrical Engineers)
Overhead traction, Electric substations, Electric locomotives operation and maintenance इसमें आते है)
How to become a DRM in Indian Railway । भारतीय रेलवे में DRM कैसे बने ?
8.संरक्षा विभाग रेलवे सुरक्षा बल (RPF) एक सुरक्षा बल है, जिसे भारतीय संसद द्वारा बनाये गए रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 के एक अधिनियम द्वारा "रेलवे संपत्ति की बेहतर सुरक्षा और सुरक्षा के लिए" जैसा कि उपरोक्त अधिनियम द्वारा परिभाषित किया गया है, स्थापित किया गया है। और वर्तमान में भारतीय रेल में रेल सम्पत्ति और यात्रियों की संरक्षा की जिम्मेदारी यही विभाग सम्हालता है। ये आठों सर्विसेज UPSC की ग्रुप 'a' इंडियन रेलवे सर्विसेज में आती है । शुरुआत में, 2 साल के प्रशिक्षण के बाद, आपको 2 साल के लिए सहायक अभियंता ( Assistant Engineer) या सहायक कार्मिक अधिकारी(Assistant Personnel Officer) जैसे परिवीक्षाधीन जूनियर स्केल अधिकारी (Probationary Junior Scale Officer) के रूप में तैनात किया जाएगा। फिर आपको एक वरिष्ठ वेतनमान अधिकारी के रूप में पदोन्नत किया जाएगा और 3 साल के बाद आप खुद को जूनियर चीफ इंजीनियर या वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी की तरह एक जूनियर प्रशासनिक ग्रेड अधिकारी पदनाम के रूप में पाएंगे। इसलिए आपको सफलतापूर्वक पास होने में 7 साल लग जाएंगे कि ऑल इंडिया एग्जाम जेए ग्रेड अधिकारी बनने के लिए। इसके बाद Senior Administrative Grade Officer जैसे Chief Engineer, Chief Personnel Officer आदि बनने के लिए 10-15 वर्षों का इंतजार करना होगा । Selection Grade and Non functional SA Grades के रूप में चयनित होने पर आपको Additional Divisional Railway Manager (ADRM) के रूप में नियुक्ति पानी होगी । 4 to 5 वर्ष SA grade में कार करने का बाद Annual Appraisal Reports और आपके कैलिबर के आधार पर आपका चयन रेलवे में DRM यानी डिवीज़नल रेलवे मैनेजर के पद पर होता है । इस तरह initial IES or Civil Service Exam में सफल होने के बाद करीब 20 -25 साल लगते हैं एक DRM के रूप में नियुक्त पाने के लिए । केवल ग्रुप ए रेलवे अधिकारी इस प्रतिष्ठित पद की अर्हता (एलिजिबिल्टी) लगभग 18 से 20 वर्षों के सेवा कार्यकाल के बाद पा सकते हैं, इसमें प्रवेश केवल रेलवे से होकर ही होता है, इस पद पर किसी अन्य इंजीनियरिंग विभाग से प्रवेश नहीं मिलता है।

वेेेतन :-
DRM एक वरिष्ठ S A ग्रेड अधिकारी है।  एसए ग्रेड में लगभग 7 साल की सेवा के बाद वह डीआरएम बन गया।  SA ग्रेड का पेस्केल Rs.10000 के ग्रेड पे के साथ 37400-67000 है
और सब मिलाकर इनका वेतन करीब 1,50,000 / - प्रति माह बैठता है ।
मण्डल (Division) स्तर प्रत्येक ज़ोन को लगभग 4-7 डिवीजनों में विभाजित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक की औसत ट्रैक लंबाई 1000 किमी है और DRM (मंडल रेल प्रबंधक) के नेतृत्व में लगभग 15000 कर्मचारियों की शक्ति है। विभिन्न इंजिनीरिंग कार्यों के निष्पादन के लिए ये बुनियादी इकाइयाँ हैं। इस स्तर पर, इंजीनियरिंग विभाग का नेतृत्व सीनियर DEN/C (सीनियर डिविजनल इंजीनियर, को-ऑर्डिनेशन) करता है। एक डिवीजन में 2 से 5 खंड होते हैं जो एक सीनियर डिविजनल इंजीनियर या DEN (डिवीजनल इंजीनियर) द्वारा प्रबंधित होते हैं। एक नया प्रोबेशनर, सहायक मण्डल अभियंता (ADEN) के रूप में शामिल होता है और 200 किमी के क्षेत्र में फैले 1000 कर्मचारियों के बारे में आदेश देता है।
WhatsApp

Post a comment

5 Comments